दवा दुकानों में CCTV अनिवार्यता के प्रस्ताव पर केमिस्ट एसोसिएशन ने जताई आपत्ति #Balrampur

भारत सरकार द्वारा दवा दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और रिकॉर्डिंग को तीन महीने तक सुरक्षित रखने की अनिवार्यता से जुड़े प्रस्ताव पर केमिस्ट एंड ड्रगीस्ट एसोसिएशन बलरामपुर ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि दवा विक्रेता पहले से ही कई कानूनी और नियामकीय प्रावधानों का पालन कर रहे हैं। ऐसे में सीसीटीवी की अनिवार्यता से छोटे और ग्रामीण क्षेत्र के दवा कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
भारत सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दवा दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने और उनकी रिकॉर्डिंग को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखने का प्रावधान सामने आया है। इसी प्रस्ताव को लेकर केमिस्ट एंड ड्रगीस्ट एसोसिएशन बलरामपुर ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
एसोसिएशन का कहना है कि देशभर के लाइसेंसधारी दवा विक्रेता पहले से ही ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, जीएसटी सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों का पालन करते हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट व्यवस्था, दवाओं की खरीद-बिक्री के अभिलेख, बैच नंबर और एक्सपायरी रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं भी लागू हैं।
संगठन का कहना है कि यदि सरकार का उद्देश्य कोडीन युक्त, नशीली अथवा दुरुपयोग की संभावना वाली दवाओं की निगरानी करना है, तो इसके लिए लक्षित और अलग व्यवस्था बनाई जा सकती है। एसोसिएशन के मुताबिक सभी दवा विक्रेताओं पर एक समान अतिरिक्त व्यवस्था लागू करने से छोटे कारोबारियों पर आर्थिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है।
अजय श्रीवास्तव
महामंत्री, CDA बलरामपुर एवं रीजनल सचिव, CDFUP
अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में सीमित संसाधनों वाले दवा प्रतिष्ठानों के लिए सीसीटीवी की स्थापना, रखरखाव और रिकॉर्डिंग के लिए स्टोरेज की व्यवस्था अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकती है। साथ ही मरीजों और ग्राहकों की निजता तथा रिकॉर्ड की डेटा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठते हैं।
एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अंतिम निर्णय से पहले CDFUP और देशभर के दवा व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जाए और नियम बनाते समय दवा व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं को भी ध्यान में रखा जाए।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अवैध दवा कारोबार, फर्जी प्रतिष्ठानों और नियमविरुद्ध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करता है। हालांकि, एसोसिएशन का कहना है कि ईमानदार और लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं पर अनावश्यक अतिरिक्त बोझ डालने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
फिलहाल सीसीटीवी अनिवार्यता के प्रस्ताव को लेकर दवा कारोबारियों की आपत्तियां सामने आई हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले व्यापारिक संगठनों की चिंताओं को किस तरह शामिल करती है।
[मोह्हम्मद तौक़ीर फरीदी ]
नई दिशा टेलीविज़न, बलरामपुर।

